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कà¥à¤› सवालों के à¤à¤•दम निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ जवाब नहीं दिठजा सकते. à¤à¤• ही सवाल के जवाब, अलग-अलग लोगों के लिठअलग-अलग हो सकते हैं.
8 मई को दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ मदरà¥à¤¸ डे मना रही है और इस मौके पर बीबीसी मराठी ने à¤à¤• अहम सवाल का जवाब जानने की कोशिश की है, वो सवाल है- मां बनने की सही उमà¥à¤° कà¥à¤¯à¤¾ है?
पूजा खड़े पाठक पà¥à¤£à¥‡ की नौकरीपेशा महिला हैं. उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 23 साल की उमà¥à¤° में मां बनने का फ़ैसला लिया था. आज वह 33 साल की हैं और उनकी बेटी 10 साल की हो चà¥à¤•ी है.
उनका कहना है कि सोच समà¤à¤•र फ़ैसला लिया था. उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया, "हर कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¤¾ होती है, उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. मेरा करियर बहà¥à¤¤ तेजी से आगे नहीं बढ़ रहा था और उस समय मà¥à¤à¥‡ लगा कि अगर मैंने बà¥à¤°à¥‡à¤• ले लिया तो आने वाले समय में फिर से अवसर मिलेंगे."
"दूसरी चीज़ जिसके बारे में मैंने सोचा था वह था अपना सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯. 23 साल की उमà¥à¤° में, मैं पूरी तरह सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ थी. मà¥à¤à¥‡ लगा कि मैं तनाव और संयम को बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ तरह से संà¤à¤¾à¤² पाऊंगी. à¤à¤• और विचार यह à¤à¥€ था कि मैं अपने बचà¥à¤šà¥‡ की बीच à¤à¤• पीढ़ी का अंतर नहीं चाहती थी. इसलिठà¤à¥€ यह फ़ैसला लिया."
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तकनीकी रूप से à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सवाल है. चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ तौर पर हर सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ की अपनी अलग-अलग मà¥à¤¶à¥à¤•िलें होती हैं. लेकिन सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रोग विशेषजà¥à¤ž डॉ. नंदिनी पलशेतकर के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• मां बनने की सबसे अचà¥à¤›à¥€ उमà¥à¤° 25-35 है.
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया, ''35 की उमà¥à¤° के बाद मां बनने में काफ़ी मà¥à¤¶à¥à¤•िलें आती हैं. इसलिठ25 से 35 साल के बीच के दस साल का सही समय होता है. 35 की उमà¥à¤° के बाद गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने की कोशिश करना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है. आजकल शादियां देर से होती हैं.''
डॉ. नंदिनी पलशेतकर के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, "लड़कियों को बहà¥à¤¤ सावधान रहने की ज़रूरत है. उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का परीकà¥à¤·à¤£ कराते रहना चाहिà¤. à¤à¤à¤®à¤à¤š (à¤à¤‚टी मà¥à¤²à¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨) नामक à¤à¤• परीकà¥à¤·à¤£ है जो अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है. यदि यह कम है, तो जोख़िम है. इसलिठलड़कियों को सावधान रहना चाहिà¤."
नागपà¥à¤° के जाने-माने सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रोग विशेषजà¥à¤ž डॉ. चैतनà¥à¤¯ शेंबेकर के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मां बनने की सही उमà¥à¤° 25 से 30 है. वह कहते हैं, ''हमारे पास आईवीà¤à¤«à¤¼ के लिठआने वाले मरीज़ों का ओवेरियन रिज़रà¥à¤µ 30 साल की उमà¥à¤° तक कम हो जाता है. 32 साल की उमà¥à¤° तक तो वे बहà¥à¤¤ कम हो जाते हैं."
माठबेटी
समापà¥à¤¤
"इन दिनों ओवेरियन à¤à¤œà¤¿à¤‚ग à¤à¤• बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ है. मेरे कà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤• में आने वाली लगà¤à¤— 30 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लड़कियों में यह समसà¥à¤¯à¤¾ होती है. शादियों में देरी होती है, फिर इसके बाद लोग ठहर कर बचà¥à¤šà¤¾ पैदा करने का फ़ैसला लेते हैं. वैसे तो आजकल अंडे फà¥à¤°à¥€à¤œà¤¼ कराने का विकलà¥à¤ª à¤à¥€ है, जिसे कई लड़कियां सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर रही हैं. लेकिन
"à¤à¤¸à¥‡ मामलों में सिरà¥à¤«à¤¼ अंडाशय ही नहीं बलà¥à¤•ि महिला की उमà¥à¤° का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा जाना चाहिà¤. जैसे-जैसे शरीर की उमà¥à¤° बढ़ती हैं, उसकी मà¥à¤¶à¥à¤•िलें à¤à¥€ बढ़ती हैं. कम उमà¥à¤° में सहने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है."
पà¥à¤°à¤¸à¤µ को सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का दूसरा जनà¥à¤® कहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान अकà¥à¤¸à¤° डायबिटीज़ और बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो जाती हैं. शेंबेकर कहते हैं, "यदि आप जलà¥à¤¦à¥€ शादी कर लेते हैं और जलà¥à¤¦à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देते हैं, तो इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से बचा जा सकता है."
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 35 साल की उमà¥à¤° में शादी की और शादी के बाद, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से बचà¥à¤šà¥‡ पैदा करने की बहà¥à¤¤ कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हà¥à¤ˆà¤‚.
बाद में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आईयूआई, आईवीà¤à¤«à¤¼ का रासà¥à¤¤à¤¾ अपनाने की कोशिश की, लेकिन करियर की वजह से उनके पास à¤à¤¸à¤¾ कराने के लिठसमय नहीं था. अंत में, , उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आईवीà¤à¤«à¤¼ कराया.
लॉकडाउन और वरà¥à¤• फà¥à¤°à¥‰à¤® होम की वजह से वह इस इलाज के लिठज़रूरी समय दे पाईं और आख़िर में वह à¤à¤• पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ सी बचà¥à¤šà¥€ की मां बनीं.
करियर की वजह से शादी में देरी और इसलिठलेट मदरहà¥à¤¡ की कहानी सिरà¥à¤«à¤¼ रीता जोशी की नहीं है.
बीते कई दशकों में, वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने देखा है कि à¤à¤• महिला के गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ उमà¥à¤° के साथ घटती जाती है.
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ लाखों शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ बनते हैं जबकि महिलाओं में अंडे होते हैं. किसी महिला के जनà¥à¤® के समय उनमें 10 लाख अंडे होते हैं. पीरियडà¥à¤¸ आने के बाद यह संखà¥à¤¯à¤¾ 300,000 होती है. 37 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° आते-आते यह संखà¥à¤¯à¤¾ 25,000 रह जाती है और 51 वरà¥à¤· की आयॠतक यह संखà¥à¤¯à¤¾ 1000 हो जाती है. इसमें केवल 300 से 400 अंडों में बचà¥à¤šà¥‡ देने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है.
जैसे-जैसे उमà¥à¤° के साथ अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ घटती जाती है, वैसे-वैसे गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ और अंडों में डीà¤à¤¨à¤ की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ à¤à¥€ कम होती जाती है.
लड़कियों में मासिक धरà¥à¤® 13 साल के आसपास शà¥à¤°à¥‚ होता है. पहले या दो साल में अंडे से अंडे निकलना शà¥à¤°à¥‚ नहीं होते हैं. वहीं 33 साल की उमà¥à¤° तक अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने की आशंका होती है. रजोनिवृतà¥à¤¤à¤¿ से आठसाल पहले अधिकांश महिलाà¤à¤‚ अपनी पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ खो देती हैं.
अमेरिकी पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति रोग विशेषजà¥à¤ž à¤à¤‚डà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ ज़à¥à¤°à¤¿à¤¸à¤¿à¤•ोवा ने à¤à¤• शोध किया जिसके मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• अंडाशय में अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ आनà¥à¤µà¤‚शिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करती है. हालांकि, अंडों की संखà¥à¤¯à¤¾ महिलाओं के जीवन में होने वाले बदलावों पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करती है. इतना ही नहीं इसकी संखà¥à¤¯à¤¾ ज़हरीले रसायनों के संपरà¥à¤• और तनाव की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करती है.
संखà¥à¤¯à¤¾ के साथ-साथ अंडों की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ à¤à¥€ à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पहलू है और उमà¥à¤° के साथ यह गà¥à¤£ कम होता जाता है.
कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ में à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं. शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, यदि गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° संबंधी विषमताà¤à¤‚ होती हैं, तो à¤à¥€ पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ में मà¥à¤¶à¥à¤•िल आती है. वासà¥à¤¤à¤µ में गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ में कà¥à¤› विषमताà¤à¤‚ होती ही हैं.
वे लगà¤à¤— सà¤à¥€ महिलाओं में मौजूद होती हैं लेकिन यà¥à¤µà¤¾ महिलाओं में यह कम होता है जबकि बढ़ती उमà¥à¤° के साथ इसके बिगड़ने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है।
कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® संबंधी विषमता का मतलब यह नहीं है कि महिलाओं के बचà¥à¤šà¥‡ नहीं हो सकते, लेकिन à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मासिक धरà¥à¤® के दौरान पैदा होने वाले अंडों के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो
हालांकि महिलाओं में अधिक उमà¥à¤° में माठबनने का चलन बढ़ा है, इस सामाजिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर "आजकल कोई 25 वरà¥à¤· की आयॠमें विवाह के बारे में सोचता à¤à¥€ नहीं है. तीसरे दशक में शादी कर लेते हैं और फिर सोचते हैं कि जब à¤à¥€ वे चाहेंगे तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बचà¥à¤šà¤¾ होगा. उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लगता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के लिहाज से 30 छोटी उमà¥à¤° है."
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